ध्यान क्या है और कैसे करे ? | Why is it important to stay focused in hindi ?

Important to stay focused:-किसी भी काम को बेहतर करने के लिए फोकस की जरूरत होती है और फोकस के लिए सबसे पहले एक सचेत मन की किसी भी व्यक्ति की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का होता है। ध्यान केंद्रित करने से हमें लक्ष्य पर फोकस करने में मदद मिलती है। यह स्पष्ट और एकाग्रता के लिए बेहद जरूरी है।

हम आजकल इतने सारे कामों में उलझे रहते हैं कि हमारे लिए ध्यान करना एक चुनौती है। इस लेख के जरिए हम हमारे ध्यान को बेहतर बनाने के लिए अपनी आदतों को बेहतर बनाएंगे। हम एक समय में एक चीज पर ध्यान केंद्रित करेंगे। आज हम सबसे महत्वपूर्ण अभ्यास के साथ शुरू करेंगे। इससे हम कम विचलित होंगे और हमारा फोकस बेहतर होगा।

सचेत focused मन है जरूरी

अपने आप को रिलैक्स करते हुए गहरी सांस ले, और धीरे-धीरे छोड़ें अपनी प्रत्येक सांस के साथ अपने शरीर को आराम दे और अपना ध्यान सांसों पर रखें समय समय पर अगर आपका मन भटक जाए तो चिंता मत करें। यह कोई गलतियां समस्या नहीं है। अभ्यास हमारे भटकते हुए मन को वापस लाने के लिए ही है। यही भटकाव हमें वर्तमान से दूर ले जाते हैं। अब धीरे धीरे शांति और स्थिरता के साथ अपने विचलित मन पर ध्यान केंद्रित करें। फिर ध्यान को वापस सांसों पर लौट आए।

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यह प्रक्रिया बार-बार करें। अब उन चीजों को ढूंढने जिनकी वजह से दिन में कभी ना कभी आपका मन विचलित रहता है। अपने मन के भटकाव को दूर करते हुए ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करें। इन सभी भटकाओं में एक बात समान है कि वह अक्सर हमारी प्राथमिकताओं से विपरीत होते हैं। सबसे पहले हमें इस बात से अवगत होना चाहिए, की सबसे अधिक हमारा मन किस और भटकता है। हमें खुद को भटकने से रोकना है और वापस ध्यान केंद्रित करना है।

जिस तरह से हमने सांसों के अवगमन के साथ अभ्यास किया था। यदि हम खुद को विचलित पाते हैं और हमारा ध्यान भटकता है तो हमें जागरुक होकर विराम लेते हुए वापस ध्यान केंद्रित करना चाहिए , और कुछ और ना करते हुए बस ध्यान देने का प्रयास करें। यही हमारे अभ्यास का पहला कदम होगा। गहरी सांस ले और धीरे-धीरे अपने शरीर को रिलैक्स होने दे धीरे से अपना ध्यान अपनी सांसों पर वापस लाएं। सांसो को नेचुरल रिदम में बहने दे।

Priority कैसे सेट करें

हमारे विचलित होने, और फोकस ना होने का हमारी प्रोडक्टिविटी पर भारी असर पड़ता है। अक्सर गलत चीजों को महत्व देकर  हमारा मन विचलित होता है।  हमें अपनी प्राथमिकताओं के प्रति सचेत रहना है। हर दिन की शुरुआत करते हुए हमें पहले यह स्पष्ट करना है कि हम किस चीज पर फोकस करना चाहते हैं ? इसमें अपने करियर और व्यक्तिगत लक्ष्य शामिल हो सकते हैं।

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चाहे फिर वह कुछ भी हो बस हमारी प्राथमिकताएं हमारे दिमाग में स्पष्ट होने चाहिए। इस लेख में हम कुछ प्राथमिकताओं को सेट करने की रणनीतियों पर प्रकाश डालेंगे। अब हम अपना अभ्यास शुरू करते हैं। आरामदायक स्थिति में सीधे पीठ करके बैठे। अपने हाथों को आराम दे। जब आप तैयार हो तो अपनी आंखें बंद करके, अब अपनी पूरी बॉडी को धीरे-धीरे रिलैक्स होता महसूस करें। कुछ गहरी लंबी सांस और पूरे शरीर को रिलैक्स होने दे।

अपने ध्यान और वापस अपनी सांसों पर लौट आए, और उन पर शुरू से अंत तक ध्यान केंद्रित करें। ध्यान के दौरान जब भी मन भटके तो उसे धीरे-धीरे अपनी सांसों पर वापस लाने का अभ्यास करें। आपका ध्यान भंग होना स्वाभाविक है कि आपका मन कहां और किस और भटक रहा है। फिर से अपना ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करें। अब अपनी सांसों पर ध्यान दें कि किस तरह वह शरीर में प्रवेश करती है और बाहर जाती है। सांसों के आने जाने को ऑब्जर्व करें।

100 बार मन भटक कर वापस आता है। आखिर यह भटकाव है क्या ? इस भटकाव पर ध्यान केंद्रित करें।  जागरुक होकर अपने शरीर की संवेदनाओं के प्रति पूरे शरीर में जागरूकता लाएं, और ध्यान दें कि हर -पल की जागरूकता में आराम करना कैसा लगता है। आप अपने ध्यान को भी एंकर की तरह उपयोग कर सकते हैं। ध्यान केंद्रित करने की आदत को बनाने में समय लगता है। लेकिन हम इस ध्यान को अपने अंदर विकसित करने का अभ्यास कर सकते हैं।

जैसा कि हमने पहले कहा था कि हमें अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए ध्यान को मजबूत करने की रणनीति अपनानी होगी। आप किन्ही 10 कामों को चुने फिर एक-एक कर उनकी प्राथमिकताओं के बारे में विचार करते हुए उनकी समीक्षा करें। और महत्व के अनुसार किसी एक का चयन करें। एक बार जब आप अपने मन में किसी प्राथमिकता का चयन कर ले। तब अपनी सोच को एक तरफ रखकर उसे पूरा करने के लिए उस पर काम करें।

हां अब वापस अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। आप जब भी खुद को विचलित पाते हैं। तब फिर से तुरंत अपने ध्यान को वापस लाने की कोशिश करें। ताकि आपका मन वापस ना भटके। अपने ध्यान को भग ना होने दे, और वापस अपनी किसी एक प्राथमिकता के ऊपर ध्यान केंद्रित करें।

अब अपने ध्यान को आराम दे, और कमरे में मौजूद ध्वनियों को सुने और उनके प्रति अपनी जागरूकता विस्तार करें। अपने ध्यान को वापस क्षण में इस कक्ष में ले आए। जब भी आप तैयार हो अपनी आंखें खोल दे।

3-Concentration को करें बेहतर

हम जितना अपने ध्यान पर काम करेंगे। उतना ही हमारा फोकस बेहतर होगा। इसलिए आज हम ध्यान को गहरा और स्थिर करने का प्रयास करेंगे। हमारे पिछले अभ्यासन में हम सांसों पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। हम अपनी सांसों को ध्यान के दौरान एक एंकर की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। हमारा ध्यान अक्सर भटक जाता है। जब हम किसी ध्वनि या विचार में पहचानते हैं।

जैसे कि हम सुबह अपने लिए पूरे दिन की एक टुडू लिस्ट तैयार करते हैं और बीच-बीच में हमारा ध्यान भटकता है। जिसको हम सांसों के एंकर के इस्तेमाल से वापस लाते हैं। हम अपनी आती जाती हुई सांसों पर ध्यान केंद्रित करते हुए शुरू करेंगे। यही जागरूकता है की जानना कि कब और कहां हमारा ध्यान भटक रहा है। यह जानना हर क्षण क्या घटित हो रहा है और जितना ज्यादा हम ध्यान के जरिए इस जागरूकता को आत्मसात करेंगे उतना ज्यादा हम हमारे फोकस को बेहतर कर पाएंगे।

जब हम ऐसा कर लेंगे तब हम यह नोटिस कर पाएंगे कि कैसे यह हमारे बाकी जीवन को भी प्रभावित करता है। जब हम किसी से बात करते समय कहीं खो जाते हैं। तब हम कैसे जल्दी से वापस अपने ध्यान को ले आते हैं। वैसे ही हमें अपने ध्यान के भटकने के तुरंत बाद ही उसे जल्दी से वापस ले आते हैं और किसी चीज से डिस्ट्रक्ट होते हैं। तब हम इस डिस्ट्रक्शन को जल्दी नोटिस करते हैं। इस अभ्यास के माध्यम से हम उसे डिस्ट्रक्शन को कम या खत्म करने का प्रयास करेंगे। जिससे कि हमें अपनी रोजाना की जिंदगी में भी बहुत मदद मिलेगी।

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चलिए एक साधारण ध्यान की प्रक्रिया का अभ्यास करते हैं।  रिलैक्स और कंफर्टेबल पोजीशन ले अपने हाथों को अपनी गोद में रख ले और जब भी आप तैयार हो अपनी आंखें बंद करें। अपने पूरे शरीर को रिलैक्स होता हुआ महसूस करें। अपने पेट को ढीला छोड़ दे। कुछ गहरी सांस एक गहरी सांस अंदर और फिर बाहर अपने चेस्ट को सांसों से भरता और सिकुड़ता महसूस करें। गहरी लंबी सांसों को अपने शरीर में आता जाता महसूस करें। अब अपनी सांसों को नेचुरल रिदम में वापस आने दे।

एकदम नेचुरल और लाइट बिना किसी तनाव की बस अंदर आती सांसों को ऑब्जर्व करें। हर सांस पर ध्यान दें। शुरू से लेकर आखिर तक, अब अगली सांस को एक काउंट के साथ, अंदर भर और छोड़ते हुए दो काउंट करें, एक गहरी सांस भरी और वापस इसी पैटर्न को रिपीट करें और दूसरी सास को भरते हुए 2, सांसों को नाचुली बहने दे। उन पर किसी तरह का तनाव ना डालें। बस उनकी रिदमिक पैटर्न को फॉलो करें। जब सांसे आपके शरीर में आए और जाय तब ध्यान दें कि क्या आपका ध्यान उन पर केंद्रित है कि नहीं।

जब भी खुद को भटकता हुआ पाए। अपने ध्यान को वापस अपनी सांसों पर ले आए दिमाग का भटकना स्वाभाविक है। इसलिए खुद की निंदा ना करें, और जागरूकता के साथ आप उसे सुधार सकते हैं।  अपनी बॉडी को रिलैक्स होता महसूस करें। साथ ही ध्यान दे की एकाग्रता के साथ बैठने पर कैसा महसूस होता है। ध्यान हमें बिना किसी दिक्कत के एकाग्रता प्राप्त करने में मदद करता है।

शुरुआत के लिए ,हमें अपने वर्कप्लेस को क्लीन और सिस्टमैटिक बनाने की जरूरत होगी। अगर आसपास और व्यवस्था और शोरगुल हो तो ध्यान केंद्रित करने में अड़चन आ सकती है। तो जब भी आप एकाग्रता का अभ्यास करें। सबसे पहले वर्कप्लेस को साफ और सिस्टमैटिक करें।

आसपास के शोर से बचने के लिए एयरप्लेन या हेडफोंस का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। हर पॉसिबल डिस्ट्रक्शन से दूरी बनाने की कोशिश करें। अपने फोन को भी एक फिक्स टाइम गैप में ही इस्तेमाल करें। जितना ज्यादा आप सिस्टमैटिक काम करेंगे उतना ज्यादा आप उन्हें एकाग्रता के साथ पूरा कर पाएंगे। यह अभ्यास थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन इसके परिणाम बहुत फायदेमंद है। अब अपने ध्यान को वापस वर्तमान में इस क्षण में ले आए। अपने हाथ को और पैरों की उंगलियों को हिलाए और जब भी आप तैयार हो अपनी आंखें खोल ले।

Digital distraction भी है जरूरी

कंप्यूटर से दूर नहीं होते, दूरी बनाना बहुत जरूरी है। आज के डिजिटल एज में फोकस होना बहुत बड़ी चुनौती है। हमारे पास ध्यान लगाने के लिए थोड़े और ध्यान भटकने के लिए अनेकों साधन है। यह सब इंटरनेट की और सीमित सुविधाओं के कारण ही मुमकिन हो पाया है। लेकिन इन सुविधाओं के बहुत से दुष्परिणाम भी हमें देखने को मिलते हैं। टेक्नोलॉजी ने हमें इंटरनेट का आदी बना दिया है। अब हम टेक्नोलॉजी को नहीं टेक्नोलॉजी हमें उसे करती है। इंटरनेट पर मौजूद सब कुछ हमें अपनी और आकर्षित करता है।

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इससे हमारे फॉक्स पर बुरा असर पड़ता है। जरा सोचिए कितना आसान है गूगल सर्च में खो जाना। जब वह आपके सामने एक सर्च कर दो तो रिजल्ट्स रख देता है। हमारी जिज्ञासा हमें मजबूरन कुछ भी पढ़ने देखने और सुनने पर मजबूर करती है। हम किसी भी वीडियो या पोस्ट पर अपना टाइम बर्बाद कर देते हैं। फोन तो जैसे अब हमारे शरीर का हिस्सा हो चला है। मानो अब वह हमारे हाथों से जुड़ता गया है। हमारा बस चली तो हम पूरी रात और सारा दिन बस इंटरनेट की दुनिया में ही रहे।

सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, फिर उनके कॉमेंट्स पर रिप्लाई करना, और पूरा टाइम सभी एक्टिविटीज पर ध्यान रखना। इन सब ने हमें हमारे जीवन के असल कामों से दूर कर दिया है। जितना आप इसे ऑब्जर्व करेंगे उतना आप डिस्ट्रक्शन को बेहतर जान पाएंगे आप जानेंगे कि दिनभर आखिर हमारा ध्यान रहता कहां है और हमें इस डिस्ट्रक्शन से हमारी इसके प्रति जागरूकता ही बाहर ला सकती है। वही हमारी वापस फोकस होने में सहायक होगी।  कंफर्टेबल पोजीशन लेकर किसी कंफर्टेबल जगह पर बैठ जाए और अपनी आंखें बंद करें।

अब शोल्डर को रिलैक्स होने दे ,और कुछ गहरी लंबी सांस ली और पूरे शरीर को रिलैक्स करने की कोशिश करें। हर सांस को शुरू से लेकर आखिर तक ऑब्जर्व करें। अपनी सांसों पर केंद्रित करें। जैसे-जैसे आप ध्यान लगाएंगे डिस्ट्रेक्शंस आना शुरू हो जाएंगे। किसी भी फॉर्म में हो सकते हैं कोई विचार कोई भाव या कोई सेंसेशन जब भी आप यह नोटिस करें कि आप डिस्ट्रक्ट हो रहे हैं अपने ध्यान को वापस अपनी सांसों पर केंद्रित करने की कोशिश करें।

अपनी सांसों को एक एंकर की तरह उपयोग करें। हर सांस को शुरू से आखिर तक फॉलो करें और ऑब्जर्व करें नोटिस कीजिए कब और कहां आपका मन डिस्ट्रक्ट होता है ? क्या वह कोई विचार है या कोई ध्वनि ? क्या आप किसी भाव से डिस्ट्रक्ट हुए थे ? डिस्ट्रेक्शंस को फॉलो करना आसान है क्योंकि वह खुद हमें अपनी और आकर्षित करते हैं। जब भी आप डिस्ट्रक्ट हो महसूस करें कि आप कब भटक रहे हैं।

जब भी आप डिस्ट्रक्ट हो ,कोशिश करें अपने ध्यान वापस फोकस करने की, सांसों को अपने शरीर में भरता हुआ महसूस करें। ध्यान अपने शरीर पर केंद्रित करें। बैक, कमर, पेट और पैरों को रिलैक्स छोड़ दे। और देखें कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं। इस दिशा में आगे बढ़ाने के लिए आप खुद के लिए कुछ सेट ऑफ रूल्स बना सकते हैं।

जिससे हर पल इमेज चेक करने की जगह सुबह और रात तो टाइम ही चेक करना। अपने काम के बीच कुछ इंटरवल या ब्रेक रख ले। जब आप टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें, उस समय टाइम का खास ध्यान रखें। डिस्ट्रेक्ट होने से खुद को रोके और इसमें अपनी इच्छा शक्ति का प्रयोग करें। आपको सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी करना ही होता है तो इसके लिए समय निर्धारित रखें और उसके पाबंद रहे। आप इस बीच काफी बार डिस्ट्रक्ट भी होंगे। लेकिन अपनी इच्छा शक्ति का इस्तेमाल कर वापस अपने फोकस पर लौटे।

Information overload से बचे

आज की मॉडल लाइफ में यह आम चैलेंज है इनफॉरमेशन ओवरलोड को हम दिन भर हमारे द्वारा देखे जाने वाले वीडियो फोटोस सुनने वाले गानों से समझा सकते हैं। एक मान्यता हुआ करती थी कि एक इंसान एक बार में 529 चीजों पर ध्यान दे सकता है। मगर सालों की रिसर्च के बाद यह सामने आया है कि हम सिर्फ तीन चीजों पर एक साथ ध्यान दे सकते हैं अगर इससे ज्यादा हुआ तो ध्यान भटकने लगता है।

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जिस तरह हम आजकल हमारा दिमाग इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारा दिमाग उस तरह काम करने के लिए नहीं बना है। यह हमें चुनना होता है कि हम एक बार में कितनी चीजों पर ध्यान देंगे और दे सकते हैं अगर इस पर ध्यान ना दे तो दिमाग भटकने लगता है और हम फोकस नहीं कर पाते। यह इनफॉरमेशन ओवरलोड हमारी हेल्थ पर भी इफेक्ट कर सकता है इससे हमें तनाव और नींद ना आने जैसी चीजों का सामना करना पड़ता है।

कुछ समझ नहीं पाते और उसके दो रीजन है की ढेर सारी इनफार्मेशन को अब्जॉर्ब करना हमें अच्छा महसूस होता है क्योंकि यह शरीर में डोपामाइन की मात्रा को बढ़ाता है। दूसरी बात यह कि हम में से बहुत लोग ऐसे पेशे से हैं, जहां ऑनलाइन रहना टेक्स्ट और ईमेल का जल्द से जल्द जवाब देना जरूरी है, तो यह सिर्फ इंटरनेट को इग्नोर करने जितना आसान नहीं है इसलिए हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम एक बार में बहुत सारी चीजों पर ध्यान न देकर कम चीजों पर ध्यान रखें। ताकि फोकस करने के लिए दिमाग में स्पेस रहे।

अब हम इसे करने की स्ट्रैटेजी पर बात करेंगे। सबसे पहले अभ्यास के लिए एक शांत जगह चुन ले, और अपनी आंखें बंद कर ले। अपने माथे और आंखों को रिलैक्स होने दे। सांसों के साथ खुद को स्थिर होता महसूस करें। रिलैक्स करते हुए गले और कंधों तक आए और उन्हें भी ढीला छोड़ दे। अब हाथों और उंगलियों पर ध्यान को ले जाए, और यहां हो रहे सेंसेशंस या किसी तनाव को ऑब्जर्व करें।

ध्यान को आप चेस्ट की ओर ले जाए और देखें, यह कोई तनाव, भाव ,विचार तो नहीं, अगर है तो उसे जाने दे। और रिलैक्स हो जाए। अपनी पीठ पर और यहां मौजूद किसी भी तरह की टाइटनेस को रिलैक्स होने दे। अपने ध्यान को अब पैरों की ओर जाने दे। और हो रहे सेंसेशंस को भी स्थिर होने दे। आप यह नोटिस करेंगे कि जब आप अपनी सांसों पर फोकस करते हैं तब आपका मन शांत और स्थिर होता है।

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