क्या हनुमान जी जीवित है | kya Hanumaan ji jeevit hai in hindi | Inspirational Kahaniya

kya Hanumaan ji jeevit hai | is hanuman ji still alive in hindi

भक्त – गुरुदेव प्रणाम! मेरी शंका का निवारण करें, ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जी अभी भी इस धरती पर जीवित है। क्या उन्होंने कभी इस संसार को नहीं छोड़ा, क्या सच में ऐसा है?

गुरुदेव– मेरे कहने से क्या होगा। तुम्हारा विश्वास ही तुम्हें सच्चाई का सबूत दे सकता है। मुझे विश्वास है, हनुमान जी आज भी हमारे पास ही है। आज भी हमारे इस ब्रह्मांड में है। हनुमान जी को सीता माता ने ,अशोक वाटिका में ,अमर होने का वरदान दिया था। लेकिन जब प्रभु श्री राम ने इस संसार को छोड़कर जाने की सोची, तब हनुमान जी बहुत विचलित हो गए थे और कहने लगे- प्रभु अगर आप ही यहां नहीं रहेंगे, तो मैं यहां रहकर क्या करूंगा?

 

प्रभु श्री राम-हनुमान! कलयुग में धरती पर बहुत पाप होंगे, लोगों में ज्ञान की, भक्ति की, कमी होगी। कलयुग में धरती पर पाप बहुत बढ़ेंगे। वहां भ्रष्टाचारी और दुराचारी होंगे। उस समय मेरा जो कोई भक्त दुखी होगा, परेशान होगा ,तुम उसके संकटों को निवारण करना। उसकी मदद करना। अब मैं तुम्हें यही सेवा सौंपता हूं। भगवान तो धरती पर अवतार लेकर आते हैं  और अपना उद्देश्य पूरा कर वापस चले जाते हैं। लेकिन हनुमान यहां रहकर हमेशा उनके भक्तों का ख्याल रखते हैं।

ऐसे बहुत से अनुभव हैं, जिसमें भक्तों ने हनुमान जी की उपस्थिति महसूस की है। तुलसीदास जी को तो हनुमान जी ने स्वयं राम जी के दर्शन भी कराए थे। हनुमान जी उनसे बार-बार मिलने आते थे। तुलसीदास हनुमान जी की भक्ति में रहते हुए, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण की रचना की ,जो हर हनुमान भक्त को जुबानी याद है।

पुराणों में कहा गया है कि हनुमान जी गंधमादन पर्वत, जो कैलाश के उत्तर में है वहां रहते हैं। जब-जब उनके भक्त उन्हें बुलाते हैं वह उनके पास पहुंच जाते हैं। कैलाश पर्वत के आसपास  बहुत से भक्तों ने हनुमान जी की उपस्थिति महसूस भी की है।

पांडवों से जुड़ी एक कथा भी है जिससे पता चलता है कि हनुमान जी द्वापर युग में भी थे। दरअसल भीम को अपने बल पर बड़ा घमंड था। जब पांडव अपने अज्ञातवास के समय गंधमादन पर्वत के पास पहुंचे हनुमान जी को वहां आराम कर रहे थे। भीम उन्हें पहचान नहीं पाए और अकड़ कर बोले- ओ वानर तुम्हारी पूंछ ने मेरा रास्ता रोका हुआ है। अपनी पूंछ तुरंत हटा लो, अगर गलती से इस पर मेरा पैर आ गया तो, जिंदा नहीं बचोगे।

मैं तो बहुत बूढ़ा हो गया हूं। मुझ में इस पूंछ को हिलाने की क्षमता नहीं, तुम ही मेरी पूंछ उठाकर एक और रख दो। भीम ने ऐसा ही करने की कोशिश की। मगर वह हनुमान जी की पूंछ को जरा भी हिला नहीं पाए। इस तरह उन्होंने भीम का बलशाली होने का अहंकार तोड़ा था।

हमारे देश में ऐसे बहुत से भक्त और साधु हुए, जिन्होंने समय-समय पर हनुमान जी के दर्शन किए। उनके दर्शन करने के लिए, उस स्तर की भक्ति भी होनी चाहिए  ।बाकी तो उनकी मर्जी कृपा करनी होती है तो करते ही है।

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भक्त- हे गुरुदेव शनि की साढे साती क्या होती है? और इसका निवारण करने के लिए हर शनिवार, हनुमान जी के मंदिर जाकर उनकी पूजा क्यों करते हैं?  गुरुदेव अगर किसी पर शनि की दशा हो तो उसे हनुमान जी की पूजा करने को क्यों बोला जाता है? क्या शनि देव हनुमान जी के भक्त हैं?

गुरुदेव- भक्त भी कई तरह के होते हैं, कुछ प्रेम के कारण, भक्ति करते है और कुछ डर के कारण, भक्ति करते है। जैसे शनि देव थे हनुमान जी के, इसके पीछे जो कथा है, मैं तुम्हें सुनाता हूं।

शनि देव, सूर्य देव के पुत्र हैं और हनुमान जी, सूर्य देव के शिष्य हैं। इस तरह हनुमान जी, शनि देव को अपने भाई के जैसा मानते थे। शनि देव, भगवान शिव के भक्त थे। बहुत न्याय प्रिय थे। किसी की कोई गलत बात बर्दाश्त नहीं करते थे।

भगवान शिव ने, उन्हें एक बार बुलाया और कहा- शनि देव मैं चाहता हूं, इस सृष्टि में ,कर्म के आधार पर दंड देने की व्यवस्था हो। जो कोई पाप करें, उसे पाप का फल मिले और जो कोई अच्छे कर्म करें, उसे उनका अच्छा फल मिले। यह जिम्मेदारी मैं तुम पर सौंपता हूं कि तुम ऐसी न्याय और व्यवस्था बनाओ और सभी का न्याय करो।

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भगवान शिव की बात सुनकर, शनि देव बड़े प्रसन्न हुए क्योंकि यह काम उनके स्वभाव से मेल खाता था। वह न्याय के देवता बन गए और ईमानदारी से कर्म के आधार पर, लोगों को दंडित करने लगे। वह अच्छे कर्म करने वालों को अच्छा और बुरे कर्म करने वालों को दंड देते थे। धीरे-धीरे उनकी शक्तियां बढ़ने लगी और उनका घमंड भी बढ़ने लगा।

एक बार हनुमान जी, श्री राम का ध्यान कर रहे थे। उनके सामने से शनि देव गुजरे, परंतु ध्यान में होने के कारण, हनुमान जी ने उनको नहीं देखा। इससे शनि देव को क्रोध आ गया कि हनुमान मुझे पहले भी कुछ नहीं समझता था और अब भी मुझे सम्मान नहीं देता। इस तरह मुझे अनदेखा कर दिया, शायद हनुमान नहीं जानता कि अब मैं पूरे संसार का न्याय करता हूं। मेरी शक्तियां असीम हो चुकी है। लगता है इसका भी न्याय करना पड़ेगा। ऐसा सोचकर शनि देव हनुमान जी को परेशान करने लगे।

हनुमान जी ने, फिर भी शनि देव की और ध्यान नहीं दिया। इससे शनि देव को और क्रोध आ गया। आखिर में शनि देव ने हनुमान जी को चुनौती दे डाली। हनुमान जी ने कहा- शनि देव मैं इस समय अपने प्रभु  श्री राम का ध्यान कर रहा हूं। शनि देव फिर भी नहीं माने। उन्होंने हनुमान जी को युद्ध करने के लिए ललकार हनुमान जी को ना चाहते हुए भी शनि देव से युद्ध करना पड़ा। उन्होंने शनि देव को अपनी पूंछ में बंधा और जमीन में पटक दिया। शनि देव का बुरा हाल हो गया। वह बहुत बुरी तरह घायल हो गए।

शनि देव ने बहुत कोशिश की, मगर वह हनुमान जी की पूंछ से मुक्त नहीं हो पाए। आखिरकार उन्होंने क्षमा मांगी और हार मान ली। मुझे क्षमा कर दो हनुमान, आगे से मैं ना तुम्हें तंग करूंगा और ना तुम्हारे भक्तों को। हनुमान जी ने क्षमा कर शनिदेव को अपनी पूंछ से मुक्त कर दिया। शनि देव बुरी तरह पीड़ा से करहा रहे थे। हनुमान जी को उन पर बड़ी दया आई।

हनुमान जी ने शनि देव को एक चमत्कारी तेल देते हुए कहा-शनि देव इस औषधि को अपने शरीर पर लगा लो। यह तुम्हें पीड़ा से मुक्ति देगा और तुम्हारे घाव को भरने में मदद देगा। शनि देव ने ऐसा ही किया, उस औषधि से उनकी सारी पीड़ा दूर हो गई। बस तभी से शनि देव को शनिवार के दिन तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई। माना जाता है ऐसा करने पर शनि देव प्रसन्न होते हैं और वह हमारे दुख तकलीफ को दूर करते हैं।

भक्त- हे गुरुदेव! जब कभी भूत प्रेतो से डर लगता है। हमारे बड़े बुजुर्ग हनुमान जी का नाम लेने के लिए बोलते हैं या हनुमान चालीसा पढ़ने को कहते हैं। हनुमान जी का नाम लेने को कहते हैं ऐसा क्यों है?
गुरुदेव- हनुमान जी की जी के तीन विशेषताएं हैं। जिनकी वजह से उनका नाम सुनकर कोई भी नकारात्मक शक्तियां हमारे आसपास नहीं ठहर सकती। पहली है उनकी भक्ति, दूसरी है उनकी शक्ति ,और तीसरी है कि वह खुद महादेव के अवतार है और महादेव भूत प्रेतो के स्वामी है।

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