नम्रता का महत्व | buddha motivational story in hindi

buddha motivational story in hindi -एक दिन बुद्ध के शिष्य आनंद ने पूछा, ‘आप प्रवचन देते समय ऊंचे स्थान पर बैठते हैं और सुनने वाले नीचे बैठते हैं। ऐसा क्यों?’

बुद्ध ने आनंद से कहा, ‘एक बात बताओ, क्या तुमने कभी किसी झरने से पानी पिया है?’

आनंद बोला, ‘हां, मैंने झरने से पानी पिया है।’

बुद्ध ने पूछा, ‘तुमने पानी कैसे पिया?’

आनंद ने कहा, ‘झरना ऊपर से बह रहा था, मैं झरने के नीचे खड़ा हो गया और पानी पी लिया।’

बुद्ध बोले, ‘अगर झरने से पानी पीना है तो नीचे ही खड़े होना पड़ेगा। जो सत्संग, कथा या प्रवचन होता है, उसमें कहने वाला ऊपर बैठता है। उस कथा का संदेश ग्रहण करना है तो सुनने वाले को नीचे ही बैठना होगा। नीचे बैठने से हमारे स्वभाव में विनम्रता आती है, हमें अच्छी बातों को जीवन में उतारने की प्रेरणा मिलती है। ऐसा करने से हमारा घमंड दूर होता है।’

बुद्ध की सीख- अगर कोई अच्छी बात सीखना चाहते हैं तो सबसे पहले अहंकार छोड़ देना चाहिए। इसके बाद विनम्रता के साथ ही अच्छी बातों को जीवन में उतारा जा सकता है।”

रोजाना जीवन में हमें सीखने और सुनने की अवस्था में होना चाहिए। जब हम विनम्रता के साथ दूसरों की बातें सुनते हैं, तो हमें नई ज्ञान की प्राप्ति होती है। अहंकार की अवस्था में हम खुद को बंद कर देते हैं, जिससे हमें अधिक जानकारी का अवलोकन नहीं होता।

बुद्ध के उपदेशों में यह संदेश छिपा है कि हमें नम्रता और समझदारी के साथ अधिक ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। अपने अहंकार को छोड़कर हम अपने आसपास की सीमाओं को पार कर सकते हैं और नए दृष्टिकोण विकसित कर सकते हैं।

समझदारी से और नम्रता के साथ बातचीत करने से हमें विस्तार से समझने का अवसर मिलता है, जिससे हमारा जीवन और भी संवेदनशील और सजीव होता है। इसलिए, हमें हमेशा नम्र और समझदारी के साथ अपने गुरुओं के उपदेशों का अनुसरण करना चाहिए।

 

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