Life lesson from buddha in hindi | जीवन की सीख | Self knowledge in hindi

Self knowledge by Buddha | आत्मज्ञान का सफर

Life lesson from buddha-ऐसा माना जाता है कि महात्मा बुद्ध आत्मज्ञान पाने के लिए कड़ी तपस्या कर रहे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी। उनके मन में तरह-तरह के सवाल आ रहे थे, जो उन्हें परेशान कर रहे थे। बुद्ध जंगल-जंगल, नगर-नगर,  यहां वहां घूमने लगे, लेकिन उन्हें अपनी परेशानियों और सवालों के कोई जवाब और उपाय नहीं मिले। अब बुद्ध के मन में निराशा आने लगी थी, और वह सोचने लगे थे कि उन्हें राजपाठ, मोह माया सब कुछ तो त्याग दिया है, फिर भी उन्हें आत्मज्ञान क्यों नहीं हो पा रहा है।

क्या कभी उनका जीवन सफल हो पाएगा? क्योंकि बुद्ध के प्रयासों में कोई कमी नहीं थी, इसलिए ऐसे अनेक ख्याल उनके मन को बेचैन करने लगे थे। ऐसे ही एक दिन बुद्ध वन में ध्यान में बैठे थे कि अचानक ही उन्हें प्यास लगी। बुद्ध पानी पीने के लिए वही पास की नदी में गए।

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Gautam buddha and squirrel | बुद्ध और गिलहरी की कहानी

जहां उन्होंने एक गिलहरी को दिखा। जो अपने मुंह में खाने के फल को दबाए हुए थी। तभी अचानक ही वह फल उसके मुंह से छूट कर वही नदी में गिर गया। गिलहरी कुछ देर तक तो देखती रही, लेकिन फिर उसने नदी में छलांग लगा दी।

Buddha & squirrel | Buddha, Animals, Funny animals

कुछ देर बाद गिलहरी नदी से बाहर निकली, और उसने अपने शरीर पर लगा पानी वहां झाड़ दिया, और फिर से नदी में कूदीऔर बाहर निकाल कर, उसने अपने शरीर पर लगे पानी को फिर से झाड़ दिया। उसे उस गिलहरी ने ऐसा कई बार किया। बुद्ध गिलहरी के इस काम को देख रहे थे, और फिर सोचने लगे कि यह सब करने से, गिलहरी को ना तो वह फल मिलेगा और ना ही उसके पानी झड़ने से, नदी का पानी खत्म होगा। लेकिन फिर भी गिलहरी हिम्मत नहीं हार रही थी ।अचानक बुद्ध को यह एहसास हुआ कि जब यह गिलहरी हिम्मत नहीं हार रही है,फिर मैं तो इंसान हूं।

आत्मज्ञान प्राप्त नहीं होने पर निराश हो रहा हूं। मुझे भी कोशिश करनी चाहिए। यह ज्ञान होते ही वह तपस्या के लिए चल दिए और एक दिन उन्हें आत्मज्ञान की भी प्राप्ति हो गई। और इस तरह, वह एक आम इंसान से, भगवान बुद्ध की महान यात्रा को तय कर पाए। ऐसा आपने कई बार सुना होगा कि आत्मज्ञान होना, खुद को दुनिया की जगह चमक धमक से दूर कर पाना, यहां तक की अपने मन को काबू कर पाना, बहुत मुश्किल होता है।

लेकिन हां यह भी एक सच है कि जो भी ऐसा करने में सफल हो जाता है, वह सच में एक ऐसा इंसान बन जाता है कि जो सबसे बेहतर जिंदगी जीता है। वह एक सच्चा साधु और बुद्धि के मार्ग पर चलने वाला इंसान कहलाता है।

इंसान जैसा सोचता है या फिर उसकी सोच जैसी होती है, वह वैसा ही बन जाता है। कोई इंसान बुरी सोच के साथ बोलता है, या काम करता ,है तो उसे कष्ट ही मिलता है। लेकिन वहीं पर अगर कोई शुद्ध विचारों के साथ बोलता है, या काम करता है, तो उसे जीवन में खुशियां मिलती है। यह खुशी उसकी परछाई की तरह उसका साथ कभी नहीं छोड़ती है। जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से बेहतर है, खुद पर जीत हासिल करना।

आत्मज्ञान होने के बाद, बुद्ध ने शिक्षा देते हुए समझाया कि कैसे इंसान सालों तक तपस्या में, लीन हुए बिना भी, नेकी के रास्ते पर चलकर, खुद को इस दुनिया की जिंदगी से दूर रख सकता है।

मैंने सालों तक तपस्या, ध्यान और चिंतन किया है। मुझे ज्ञान की प्राप्ति होने में समय लगा, क्योंकि मैं खुद की खोज में ही उलझा रहा, लेकिन मैंने जो ज्ञान प्राप्त किया, उसकी मदद से सभी का कल्याण होना संभव है। बस उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और उन्हें यह वादा भी करना होगा कि जब से वह, खुद अच्छाई के रास्ते पर चलना शुरू करेंगे, उसके बाद वह अपने इस सफर में, बाकी लोगों को भी शामिल जरूर करेंगे।

Life lesson from buddha | जीवन की सीख

पहली जिस बात का ध्यान रखना है, वह यह है कि इंसान कभी भी, बुराई से बुराई को खत्म नहीं कर सकता। इसे खत्म करने के लिए, इंसान को प्रेम का सहारा लेना ही पड़ेगा। प्रेम से दुनिया की हर बड़ी चीजों को जीता जा सकता है।

दूसरी जरूरी बात यह है, कि आने वाले कल के बारे में, सपने देखकर, अभी से मत उलझो और अपने बीते हुए, समय को भी याद करके पछताने से अच्छा है कि अपने आज में रहो। आज का समय सबसे अनमोल होता है। उसे खुलकर खुशी से जीना चाहिए। खुश रहने का सबसे अच्छा तरीका यही है।

तीसरी जरूरी बात यह है कि खुशियां बांटने से, कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए। जिस तरह से, एक जलता हुआ दिया, हजारों लोगों को रोशनी देता है। ठीक वैसे ही खुशियां बांटने से, आपस में प्यार बढ़ता है, और रिश्ता मजबूत बनता है। खुशियां बांटने से हमेशा बढ़ती है, कभी कम नहीं होती है।

अब आखरी और सबसे जरूरी बात यह है कि जंगली जानवर से भले ही ना डरो या उससे दूर ना रहो, लेकिन एक कपटी और दुष्ट मित्र से डरना भी चाहिए और उससे दूर भी रहना चाहिए। जंगली जानवर बस हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन एक बुरा मित्र, हमारी बुद्धि को, हमारी भावनाओं को, हमारे हृदय को, नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए खुद भी, एक अच्छा और नेक मित्र बनने की कोशिश करो।

बुद्ध की सीख को उनके शिष्यों ने भी लोगों में फैलाना शुरू किया। इससे लोगों में एक नई, नेकी की लहर सी दौड़ने लगी। मम्मी बुद्ध के नियम और सिद्धांतों की गूंज साफ सुनाई देने लगी थी कुछ ऐसे लोग भी थे जो यह जानते थे कि बुद्ध हमेशा से बुद्ध नहीं थे। वह महल में आराम की जिंदगी, जीने वाले सिद्धार्थ थे, और अपने बेटे के जन्म के कुछ ही दिनों बाद, सिद्धार्थ ने अपने पिता से, महल को छोड़ देने की बात कही थी।

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