माता-पिता भगवान का रूप हैं- Maata-pita Bhagavaan ka roop hain
राधे राधे!🙏🙏
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अगर माता-पिता भगवान का रूप हैं तो क्या उनका नाम जप कर सकते हैं ?
राधे राधे महाराज जी! क्या माता-पिता का नाम जप करके भगवत-प्राप्ति की जा सकती है?
महाराज जी— नहीं माता-पिता की सेवा की जा सकती है, लेकिन नाम जप भगवान का होना चाहिए। जिस प्रकार “मां” और “मां जैसी” में अंतर है। माता-पिता भगवान जैसे हैं, लेकिन भगवान नहीं हैं। सृष्टि का जो चक्र चल रहा है, वह भगवान के आदेश से चल रहा है। संसार में अनंत माता-पिता हैं—हमारे माता-पिता, तुम्हारे माता-पिता, पशु-पक्षियों के माता-पिता—सभी का पालन-पोषण करने वाला केवल एक परमात्मा है, जिसकी समानता कोई नहीं कर सकता।

हम भाव से कह देते हैं कि बड़ा भाई, माता-पिता, परिवार, सभी में भगवान की भावना करते हैं, लेकिन वे संपूर्ण भगवान नहीं हो सकते। ऐसा नहीं हो सकता कि हम उनका नाम जपें, उनकी आरती उतारें और सोचें कि इससे भगवत-प्राप्ति होगी, क्योंकि इससे हमे प्रेम नहीं बल्कि मोह पैदा होगा। प्रेम तब होता है जब हम भगवान की भावना करते हैं और भगवान का नाम लेते हैं। भगवान के समान केवल भगवान ही हैं। जैसे सूर्य और चंद्रमा उनके प्रकाश से प्रकाशित होते हैं, उनके भय से पृथ्वी जल में नहीं डूबती, उनके भय से वायु चलती है—तो भगवान जैसा कोई हो सकता है क्या? भगवान अद्वितीय हैं। हां, माता-पिता को भगवान जैसा दर्जा दिया गया है, लेकिन वे भगवान नहीं हो सकते।
क्या माता पिता में वो शक्तियां है जो हमारे प्रभु में है। प्रभु कौन हैं? वे जो संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति करते है।उनका पालन और विनाश करते है। संसार अविद्या के मोह में फंसा है, और विद्या से प्रकाशित होकर संत-महात्मा भगवान के चरणों में चित्त जोड़ते हैं। वह भगवान जिसके समान कोई नहीं। ब्रज में देख लो—गिरिराज जी 21 किलोमीटर लंबे हैं, और भगवान ने उन्हें सात दिन-सात रात उठा लिया। हम तो 100 ग्राम का भार सात दिन-सात रात नहीं उठा सकते।
भगवान ने छठे दिन पूतना जैसी भयानक राक्षसी का संहार किया, जिससे देवता भी डरते थे। बाल्यावस्था में भगवान ने ही तणावर्त, अघासुर, बकासुर जैसे राक्षसों का अंत किया। काली दह, जो इतना जहरीला था कि उसके ऊपर से पक्षी उड़कर भी मर जाते थे—वहां भगवान कूद गए और कालिया नाग का अभिमान चूर कर उसे भगा दिया। एक दिन ब्रज में जंगली आग लग गई, तब भगवान ने सबको आंखें बंद करने को कहा और अपने मुख में पूरी अग्नि को पी गए।

भगवान जैसा कोई नहीं हो सकता। हम भाव से कह सकते हैं कि हमारे माता, पिता भगवान हैं, गुरु भगवान हैं, लेकिन क्या सारे विश्व के गुरु मिलकर भी भगवान का कार्य कर सकते हैं? समुद्र की गहराई, आकाश की विशालता, प्रकृति का परिवर्तन—ये सब भगवान की रचना है, जिसे कोई बदल नहीं सकता। संत-महात्मा को हम भगवान जैसा मान सकते हैं, लेकिन भगवान तो भगवान हैं, जो कर सकते हैं, वह दूसरा नहीं कर सकता।
इसलिए माता-पिता का नाम जप न करें, बल्कि उनकी सेवा करें। ऐसे कर्म करे जिससे वह प्रसन्न हो। बुढ़ापे में उनकी जरूरतों की पूर्ति करे। नाम जप भगवान का करें—राम, कृष्ण, हरि, राधा—जो भी नाम प्रिय लगे, उसी का जप करें। तभी हम भगवत प्राप्ति हो सकती है।
राधे राधे!🙏🙏
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हमारे शरीर और मानसिक आरोग्य का आधार हमारी जीवन शक्ति है। वह प्राण शक्ति भी कहलाती है।